Delhi में ममता बनर्जी समेत 3 पूर्व मुख्यमंत्री हिरासत में, CJP प्रदर्शन में बैरिकेड तोड़े, 1000 समर्थकों को पुलिस ने पकड़ा
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर शनिवार को राजनीतिक माहौल गरमा गया। प्रदर्शन के दौरान पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है। वहीं, जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए। पुलिस ने करीब 1000 CJP समर्थकों को हिरासत में लिया।
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया रोकने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान तक पहुंचने से रोकने के लिए कई जगह बैरिकेड लगाए। इसके अलावा वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए सड़कों पर कीलें भी लगाई गईं।
जंतर-मंतर पहुंचने से पहले पुलिस ने रोके प्रदर्शनकारी
CJP समर्थकों ने जंतर-मंतर पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। इस दौरान कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी।
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच रहे पार्टी के कुछ नेताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। इनमें CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास के नाम शामिल हैं। पार्टी के अनुसार, इन नेताओं को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से उतरने के बाद हिरासत में लिया गया।
इसके अलावा यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी गुरुग्राम स्थित उनके घर से हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, हिरासत में लिए गए सभी लोगों की स्थिति और आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

CJP की क्या हैं मांगें?
कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग उठाई है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया से लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत मतदाता सूची की विस्तृत जांच और संशोधन किया जाता है। इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। CJP ने इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन बुलाया था।
पार्टी समर्थकों का कहना है कि मतदाता सूची और मतदान के अधिकार से जुड़े सवालों पर सरकार तथा चुनाव आयोग को जवाब देना चाहिए। वहीं, इस मामले में चुनाव आयोग का पक्ष और प्रदर्शनकारियों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने दिल्ली पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जरूरत से ज्यादा सुरक्षा बलों की तैनाती के कारण कई लोग प्रदर्शन में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
द्रेज के मुताबिक, सरकार को हिंसा या सुरक्षा के खतरे से ज्यादा इस बात की चिंता है कि लोगों को अपने मताधिकार से जुड़े मुद्दों की जानकारी मिल सकती है। उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा इंतजामों के कारण प्रदर्शन में भाग लेने की लोगों की क्षमता प्रभावित हुई है।
हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस का पक्ष भी सामने आना महत्वपूर्ण है। प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग, वाहनों की आवाजाही पर रोक और हिरासत की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ने की संभावना है।
अभिजीत दीपके की दादी का 85 साल की उम्र में निधन
इस पूरे घटनाक्रम के बीच CJP संस्थापक अभिजीत दीपके के परिवार से दुखद खबर सामने आई। उनकी दादी सावित्रीबाई शंकर दीपके का 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं। उन्होंने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी में अंतिम सांस ली।
जानकारी के मुताबिक, अभिजीत दीपके के माता-पिता हिंगोली जाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दिल्ली पुलिस अभिजीत दीपके को अपने गांव जाने की अनुमति कब देगी। परिवार के लिए यह मुश्किल समय है, क्योंकि दादी के निधन के बाद अंतिम संस्कार में शामिल होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
इमरजेंसी से तुलना पर क्या बोले अभिजीत के पिता?
अभिजीत दीपके के पिता से जब मौजूदा घटनाक्रम की तुलना इंदिरा गांधी के शासनकाल में लगी इमरजेंसी से जुड़े सवाल पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि वह ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं और उन्हें इस विषय में सीमित जानकारी है।
उन्होंने बताया कि उन्हें इतना पता है कि इंदिरा गांधी के कार्यकाल में इमरजेंसी लगाई गई थी। इसके बारे में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन वह जानते हैं कि इमरजेंसी के बाद इंदिरा गांधी दोबारा सत्ता में लौट आई थीं।
दिल्ली में CJP के प्रदर्शन, नेताओं की हिरासत, मतदाता सूची में संशोधन को लेकर उठे सवाल और अभिजीत दीपके के परिवार से जुड़ी खबरों ने पूरे घटनाक्रम को चर्चा में ला दिया है। अब इस मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान महत्वपूर्ण होंगे।







